Bharatiya Kisan Sangh

किशनगढ़/ अजमेर 25 फरवरी 2024: भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय संगठन मंत्री श्री दिनेश कुलकर्णी ने समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि देश में जो वर्तमान दौर चल रहा है उसमें भारतीय किसान संघ को राष्ट्र हित के संवर्धन विचार को लेकर आगे बढ़ना होगा। सदस्यता अभियान पर अपनी बात रखते हुए श्री कुलकर्णी ने कहा कि एक लाख गांवों तक ग्रामसमिति का गठन कर एक करोड़ सदस्य बनाने का लक्ष्य लिया था। आज हम साठ प्रतिशत लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल हुए है। पूर्ण लक्ष्य प्राप्त करने के लिए दृढ़ संकल्प लेकर कार्यकर्ताओं को परिश्रम के साथ कार्य करने की जरूरत है। सदस्यता लक्ष्य प्राप्ति के बाद भारतीय किसान संघ को विश्व का सबसे बड़ा संगठन होने का गौरव प्राप्त होगा। भारतीय लोकतंत्र पर चर्चा करते हुए संगठन मंत्री श्री कुलकर्णी ने लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए राष्ट्र हित में मतदान कराने गांव गांव जनजागरण अभियान चलाने का आग्रह भी किया। इसके बाद प्रांत संगठन मंत्री परमानंद ने प्रतिनिधि सभा में व्यवस्था कार्य में लगे कार्यकर्ताओं का परिचय भी हुआ।

युवाओं व महिलाओं की सदस्यता बढ़ी
प्रतिनिधि सभा में सदस्यता अभियान की समीक्षा के दौरान जो आंकड़ा सामने आया है। सदस्यता मे युवा किसानों और महिला किसानों की सदस्यता में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसके बढ़ने के पीछे भारतीय किसान संघ द्वारा संगठनात्मक, आंदोलनात्मक व रचनात्मक गतिविधियों को माना जा रहा है।

आयामों ने रखे अपने वृत्त
भारतीय किसान संघ में विभिन्न क्षेत्रों में अपने कार्य को बढ़ाने की दृष्टि से चौदह आयामों का गठन किया गया है। जिसमें महिला, गन्ना, प्रचार, जनजाति, रोजगार, बीज, एफ पी ओ, जल, हिमालयन, विपणन, जैविक, नारियल, ऊर्जा आयामों के माध्यम से ग्राम समिति तक पहुंच बढ़ाई जा रही है। इन आयामों के प्रमुखों ने आयाम की प्रगति व विस्तार कार्ययोजना का वृत्त रखा।

ये रहे उपस्थित
भारतीय किसान संघ की प्रतिनिधि सभा में देश भर से पैंतीस से अधिक प्रांतों से आए पंद्रह सौ प्रांत स्तर के पदाधिकारियों के साथ किसान संघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष बद्री नारायण चौधरी, कार्यकारी अध्यक्ष व उपाध्यक्ष राम भरोसे वासोतिया, महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ चितौड़ के प्रांत प्रचारक विजय आनंद, संगठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी, उपाध्यक्ष भैयाराम मोर्य, पेरूमल जी, मंत्री बीना सतीश, बाबूभाई पटेल, साई रेड्डी, भारतीय एग्रो इकोनॉमिक रिसर्च सेंटर के अध्यक्ष प्रमोद चौधरी, प्रचार प्रमुख राघवेंद्र सिंह पटेल आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

राघवेंद्र सिंह पटेल
अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख
भारतीय किसान संघ
9425357127

नई दिल्ली 13 फरवरी- भारतीय किसान संघ किसानों की उपज का लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य की मांग को लेकर लगातार संघर्ष कर रहा है। देश की सरकारों के साथ संवाद कर किसानों के पक्ष को मजबूती से रखता आया है। जहां संवाद से रास्ता नहीं निकलता है तो आंदोलन भी करता है। उक्त बातें भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने अपने जारी बयान में कही। उन्होंने कहा कि 19 दिसम्बर को दिल्ली के रामलीला मैदान में किसान गर्जना रैली के रूप में एक लाख किसानों का अनुषासित शांतिपूर्ण प्रदर्षन इसका उदाहरण है। देश भर से किसान दिल्ली में आये शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार से कही और बिना किसी को परेशान किये वापिस लौट गये।

श्री मिश्र ने कहा कि जब राजनैतिक मंसा के साथ किसानों के कंधे का प्रयोग कुछ लोग अपनी राजनैतिक हित साधना के लिये करते है तो पीड़ा होती है। भारतीय किसान संघ का मानना है कि जब किसान के नाम पर राजनैतिक आंदोलन चलता है तो इसका नुकसान सिर्फ किसानों को होता है। विगत वर्षों में मंदसौर व दिल्ली में हुये आंदोलन इस बात के प्रमाण है। कहीं छैः तो कहीं आंकड़ा छै सौ तक भी पहंुचा है, जहां किसानों को अपनी जान गंवानी पड़ी। उनके मुद्दे व मांगे जस की तस हैं। इसलिये भारतीय किसान संघ का आग्रह है कि किसानों के नाम पर राजनैतिक चुनावी पैंतरावाजी बंद होनी चाहिए।

किसान हित में लड़ने वाले संगठन लगातार किसानों की समस्या निवारण के लिये लड़ रहे हैं। सरकार किसी की भी हो सामंजस्य से किसानों की समस्याओं का समाधान निकाल भी रहे हैं। लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य किसान का हक है वह उसे मिलना ही चाहिये। आज बीज व बाजार किसानों की प्रमुख समस्या है, मंडी के अंदर हो या बाहर किसान के साथ बीज व बाजार में शोषण बंद होना चाहिये।

महामंत्री श्री मिश्र ने कहा कि जब राजनैतिक मंशा से चुनाव के दौरान किसान के नाम पर आंदोलन होते हैं तो आंदोलन के दौरान होने वाली हिंसा, अराजक माहौल, राष्ट्र की संपति का नुकसान होने से समाज में किसान के प्रति नकारात्मक भाव जन्म लेेता है। जिसका खामियाजा अपनी बेहतरी के लिये संघर्षरत किसान को चुकाना पड़ता है। इसलिये भारतीय किसान संघ हिंसक आंदोलन का समर्थन नहीं करता है। हमारा आग्रह है कि जिन लोगों को अपनी राजनैतिक महत्वाकांछा पूरी करनी हैं वो करें। लेकिन समाज में किसान के प्रति नकारात्मक भाव को पैदा न करें। हम पुनः दोहराते हैं कि लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य किसान का हक है वह किसान को मिलना चाहिये।

हमारी मांगे है-
1.⁠ ⁠लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य किसान का अधिकार है।
2.⁠ ⁠कृषि आदानों पर जीएसटी समाप्त की जाये।
3.⁠ ⁠किसान सम्मान निधि में बढ़ोतरी की जाये।
4.⁠ ⁠जहर नहीं जैविक चाहिये, जीएम बीज की अनुमति नहीं दी जाये।
5.⁠ ⁠बीज किसान का अधिकार है।
6.⁠ ⁠घोषित समर्थन मूल्य से बाजार भाव नीचे न जाए। इसको सरकार सुनिश्चित करे।

मोहिनी मोहन मिश्र
अखिल भारतीय महामंत्री, भारतीय किसान संघ

DG Discussing with owner farmer

Dr Trilochan Mohapatra, Secretary (DARE) & Director General (ICAR) visited the Dada Lad Cotton Production Technology a Farmer’s Innovative Agro-Technique for enhancing Cotton Productivity in Maharashtra Plots in Sipora Ambhora Village, Jaffrabad Tehsil, Jalna District, Maharashtra on October 14, 2021.

Dr. T C Mahapatra addressing, DG ICAR

Addressing farmers at the innovative plots, the Director-General applauded the potential of the “Dada Lad” Technique for doubling the average productivity of cotton in the irrigated areas in Maharashtra. He also emphasized the scope for the spread of technique to the similar agro-ecologies in the other states where irrigated cotton is cultivated like Punjab. Dr Mohapatra also urged the cotton researchers to study the agro-techniques practised by the farmers – Shri Rameshwar Ambhore and Shri Kishore Chavan.

Dada Lad explaining his Cotton Production Technology

DG Discussing with owner farmer

DG Discussing with owner farmer

Earlier, Shri Dada Lad, Farmer gave a live demonstration of the innovative technique to the participating farmers. Shri Dinesh Kulkarni, Organization Secretary, Bhartiya Kisan Sangh underlined about “Dada Lad” Technique’s adoption by around 700 farmers in Jalna, Jalgaon and Nandurbar Districts.

Dinesh Kulkarni, Organization Secretary, Bhartiya Kisan Sangh

He also stressed the promotion of such technologies by the ICAR and other stakeholders for profitable farming and retaining the rural youth in agriculture. Dr Suresh Kumar Chaudhari, Deputy Director General (Natural Resource Management & Agricultural Engineering), ICAR along with Senior Officials of ICAR & its Institutes and Vice-Chancellors of State Agricultural Universities were also present during the occasion.

Dada Lad Cotton Production Technology

India is one of the largest producers of cotton in the world accounting for about 26% of the world cotton production. Cotton yield is presently 459 Kg/ha is still lower against the world average yield of about 757 Kg /ha. Although Maharashtra has the highest area under cotton with 41.84 lakh hectares, the average 350 kg/ha yield is the lowest among all states.

Dada Lad Cotton Production Technology

Dada Lad Cotton Production Technology

In cotton, lateral branches are produced from the axils of the leaves of the main stem. There are two types of branches i.e. vegetative (monopodial) and reproductive (sympodial), the latter bears the bolls. Vegetative (monopodial) branches are structurally similar to the main stem and arise from the main stem near the ground and grow in an upright position. The number of vegetative branches depends primarily on the environment and plant spacing. Sympodial branches develop from buds on the main stem and are defined by the presence of floral buds (squares), flowers and fruits.

 The saga of Dada Lad Cotton Production Technology

A devoted social worker Shri. Dada Lad, Organization Secretary of Bhartiya Kisan Sangh, Maharashtra and Goa state has a keen interest in cotton production, due to his association with the crop from childhood as cotton was the cash crop for his family livelihood. Therefore, he always bears a special bonding with cotton and whenever he comes across any agro-technology, he tries to extrapolate it in cotton. About 15 – 16 years ago while on tour for organizational work of Bhartiya Kisan Sangh, he was in a banana orchard. He observed that the farmers were removing the pseudo-stems. Upon enquiry, it was revealed to him that these lower branches are vegetative only and do not bear reproductive growth. Also, if left un-cut, it takes major nutrients and the ultimate yield is decreased.

Immediately he correlated it to the cotton crop where monopodial branches become thick than sympodial branches. He decided to implement the concept of removal of vegetative branches and started an experiment in a farmer’s field. He also made an intervention of promoting lateral branches by de-topping. The results were overwhelming.

The number of bolls per plant and boll weight significantly increased just be by removing monopodial branches after 40- 45 DAS. Encouraged by the results he convinced a group of farmers to adopt this experiment in the vicinity. Farmers who adopted also got convinced that a meagre intervention would give back a significant yield increase.

Details of Technology

  • Removal of monopodial branches at 45-50 DAS
  • De-topping of cotton plants

One of the most interesting observations was that the removal of monopodial branches and de-topping of cotton plants resulted in a large accumulation of assimilates in the root system, which indicates that there is an increase in the flow of nutrients to the sinks and consequently more assimilates towards the old bolls or for initiating new and additional bolls.

This combination practice also resulted in better light penetration into the plant canopy, increased air circulation among plants resulting in an improved CO2 supply for photosynthesis, lower humidity, and a reduction in the amount of boll infestation on early set fruit. The overall effect of this technology is an increase in boll weight and the number of bolls, resulting in increased seed cotton yield. Technology has been immensely popularized in the last couple of years. At present more than 700 farmers with 1600 acres from Vidarbha and Marathwada has adopted this technology.

Recently scientific experimentation has been initiated at KVK, Nandurbar (MS). However, it is requested that the technology may be improvised further with its implementation through state and central govt. agencies in the interest of cotton growers. The results of the technology at farmers’ field are as follows:

DG Discussing with owner farmer

DG Discussing with owner farmer

1. Name of farmer: Shri. Rameshwar Ambhore

Village: Sipora-Abhora, Tq.:  Jafrabad.Dist.: Jalana

Date of sowing: 30 May 2020

Treatments Spacing (ft) Removal of monopodial(DAS) Detopping  (DAS) No.of sympodial No. of bolls/plant Avg.weight of  boll(g) Seed cotton yield (q/acre)
Farmers practice 4×2 14 62 3.2 8.5
Dada Lad Cotton Production Technology 3×1 45 90 10 50 6 33.5
  • 10-15% yield loss was observed due to boll rot (unseasonal rains).

 

2. Name of farmer: Shri. Kishor Chavhan

Village: Nimkheda  Tq. Jafrabad.Dist.: Jalana

Date of sowing: 2 June 2020

Treatments Spacing (ft) Removal of monopodial(DAS) Detopping  (DAS) No.of sympodial No. of bolls/plant Avg.weight of  boll(g) Seed cotton yield (q/acre)
Farmers practice 4×2 14 59 3.1 8.2
Dada Lad Cotton Production Technology 2×1 45 60 6 20 6 18.6
Dada Lad Cotton Production Technology 3×1 45 90 10 50 6 32.4
  • 10-15% yield loss was observed due to boll rot (unseasonal rains).

From the above results, it is seen that with the adoption of an improved method ( Dada Lad technology ) seed cotton yield, as well as some yield components, were increased as compared with the farmer’s practice. The yield was increased in the range of 295 % in the spacing of 3×1ft, and 126% in the spacing of 2×1 as compared to farmers practice (4×2ft ).

किसान शक्ति, नई दिल्ली,
दिनांक – 04.10.2021

– लखीमपुर घटना पर भारतीय किसान संघ की प्रतिक्रिया –

दिनांक 3 अक्टूबर 2021 को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में जो घटना घटी, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। घटना में लिप्त लोग किसान नही थे, विविध राजनैतिक दलों के थे, वामपंथी तरीकों से घटना को अंजाम दिया गया। लाठियों से पीट-पीटकर लोगों की निर्मम हत्या की गई, जो कम से कम किसान तो नहीं कर सकते।

कानून हाथ में लेना, सरेआम हत्याऐं कराना, ऐसा लगता है जैसे प्रोफेसनल लोगों ने, जल्लादों ने यह कार्य किया हो। इस घटना की जितनी निन्दा की जावे, कम है। इस प्रकार के कृत्यों में लिप्त लोगों को कठोरतम दण्ड दिया जाना चाहिए।

भारतीय किसान संघ मांग करता है कि इस जघन्य घटना की निष्पक्ष जांच जल्दी से जल्दी करके मृतकों के परिजनों को न्याय मिलें । भारतीय किसान संघ मृतक परिजनों के साथ संवेदना प्रकट करता है।

(महामंत्री)
भारतीय किसान संघ

भारतीय किसान संघ मेरठ प्रान्त व उत्तम खेती संस्थान के संयुक्त कार्यक्रम द्विदिवसीय गौ आधारित जैविक खेती प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन 2-3 अक्टूबर 2021 को अग्रवाल धर्मशाला थाना भवन जनपद शामली में अखिल भारतीय सह-जैविक प्रमुख नीलकंठ की उपाधि से सुशोभित आ0 ठाकुर धर्मपाल जी के मार्गदर्शन में किया गया।

श्रीमान धर्मपाल जी व जैविक प्रशिक्षको द्वारा मेरठ प्रांत सहित देश के विभिन्न प्रान्तों से आये सैंकड़ों किसानों को गौआधारित जैविक खेती करने,भूमि सुपोषण,प्रकृति
पर्यायवरण,प्रसंस्करण,विपणन आदि विषयों पर किसानों को प्रशिक्षण दिया व बाजार में अपने उत्पाद की बिक्री और माँग के लिये बाजार की उपलब्धता की जानकारी प्रदान की गई।

मुख्य अतिथि द्विप्रदेशिय संगठन मंत्री श्री शिवकांत दीक्षित ने समापन सत्र में किसानों से अपने उद्बोधन के प्रारम्भ करते हुए कहा कि –

कोई चलता पद चिन्हों पर कोई पद चिन्ह बनाता है।
बस वही सूरमा वीर पुरुष,दुनिया में पूजा जाता है। ।
देता संघर्षों को न्योता,मानवता की खातिर जग में,
ठोकर से करता दूर सदा,जो भी बाधा आती मग में
जो दान रक्त का देकर भी,अपना कर्तव्य निभाता है
बस वही सूरमा वीर पुरुष,दुनिया में पूजा जाता है।

ऐसे देवतुल्य किसान को मैं प्रणाम करता हूँ और कहा कि सब लोग अपना अपना परिचय देते है कि मैं एक डॉक्टर, हूँ इंजीनियर हूँ वैज्ञानिक हूँ आदि आदि ये इंजीनियर,वैज्ञानिक बनने के लिये इनको किसी ना किसी विश्वविद्यालय में शिक्षा लेने पड़ी होगी लेकिन किसान एक ऐसा वैज्ञानिक है जो बिना किसी विश्वविद्यालय गए यह जनता है कि उसको कौन सी फसल किस नक्षत्र में किस दिशा में किस समय बोनी किस समय खाद्य पानी देना है हो सकता है वह अंग्रेजी भी नही जानता हो ओर हो सकता कि वह हिंदी भी पढ़ना नही जानता हो वह सिर्फ और सिर्फ कृषि वैज्ञानिक किसान ही है और अर्थ की चिंता किये बैगर देश के भरण पोषण के अपने परिश्रम से उत्पादन करता रहता है तो इसलिये देश वासियों को किसान का सम्मान करना चाहिये व उसके संम्मान के कार्यक्रम करने चाहिये।

इस देश में 70%किसान है जो अधिकतर सरकार की योजनाओं पर ही निर्भर रहते जब तक किसान स्वयं को उद्दमी बनाने पर ध्यान नही देगा तब तक किसान की आय नही बढ़ पाएगी।किसानों के उत्पाद को कंपनियां उत्पाद की गुणवक्ता आकार श्रेणी आदि के अनुसार प्रसंस्करण कर हमारे ही 20 रुपये किलो के गेँहू को दलिया बनाकर बाजार के माध्यम से 60-80 रुपये किलो का विपणन कर बिक्री कर देता है आज किसानों को अपनी आय बढ़ाने के लिये इस प्रकार के प्रयोग करने पड़ेंगे, इस प्रकार के व अनेक प्रकार उत्पाद तैयार करने के लिये कम कीमत के अच्छे यंत्र उपलब्ध है और भारतीय किसान संघ गौ-आधारित खेती करने व प्रसंस्करण का प्रशिक्षण देने ,विपणन हेतु मंडी उपलब्ध कराने का निरन्तर निशुल्क कर रहा है।

इन सब बातों का ध्यान रखते हुए भारत माता की जय के साथ साथ हमे एक नारा और बुलन्द करना होगा जिससे देश मे किसानों के प्रति आदर का भाव विकशित होगा और वह नारा है:- माई कल्चर इज माई एग्रीकल्चर

चंदगड, दि. २७ सितंबर : बायसेफ अनुसन्धान इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ शोधकर्ता संजय पाटिल ने कहा, कई पीढ़ियों से खेती किए जाने वाले पारंपरिक बीज यहां की कृषि की जीवनदायिनी हैं। वे भारतीय किसान संघ द्वारा आयोजित ‘पारंपरिक बीज संरक्षण एवं महत्व’ पर आयोजित कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन राम मंदिर में किया गया।

पाटिल ने कहा, “यद्यपि रासायनिक उर्वरकों और संकर बीजों का उपयोग करके हरित क्रांति का प्रयोग सफल रहा है, मानव शरीर पर इन खाद्य पदार्थों का प्रभाव पारंपरिक स्वदेशी है। इसलिए, पारंपरिक स्वदेशी बीज किस्मों को संरक्षित और खेती करना आवश्यक है।”

स्थानीय किस्मों का संरक्षण कर इसकी शुद्धता कैसे बढ़ाई जाए और अन्य किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए कम लागत पर खेती कैसे की जाए, इस पर मार्गदर्शन दिया। BICEF के पास धान, नाचनी और सब्जियों जैसी पारंपरिक फसलों की 350 किस्में हैं।

इसे किसान संघ के माध्यम से इच्छुक किसानों को नि:शुल्क देने का निर्णय लिया गया। भारतीय किसान संघ के सदस्य पंजीकरण अभियान की जानकारी दी गई।

इस अवसर पर वरिष्ठ किसान विठोबा गुलामकर, तुकाराम ओउलकर, जयराम गावड़े, महादेव पड़वले, अनिकेत मांद्रेकर, चंद्रकांत पाटिल, संदीप गावड़े, संजय पाटिल, गणपति पाटिल उपस्थित थे।

मंच से बात कर रहे श्री प्रकाश सिंह रघुवंशी, प्रदेश जैविक खेती प्रमुख

मंच से बात कर रहे श्री प्रकाश सिंह रघुवंशी, प्रदेश जैविक खेती प्रमुख

भारतीय किसान संघ जिला अशोक नगर की तहसील नईसराय का एक दिवसीय अभ्यास वर्ग ग्राम डूगासरा की पठार पर दिनांक 25-08-2021 बुधवार को आयोजित किया गया।

अभ्यास वर्ग में संघ के पदाधिकारियों के द्वारा नवीन कार्यकारिणी को संगठन के वारे में एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें प्रदेश जैविक प्रमुख श्री प्रकाश सिंह जी रघुवंशी ने किसानों को जैविक खेती करने के करने की सलाह दी।  जिससे किसान खेती की लागत को कम करके अपनी आमदनी को बढ़ा सकते हैं ।एवं जसवंत सिंह रघुवंशी प्रान्तीय उपाध्यक्ष गुना द्वारा संघ के संस्थापक श्री ठेंगड़ी जी के जीवन परिचय को विस्तार से जानकारी दी गई ।

अभ्यास वर्ग में अन्य मुख्य अतिथि प्रान्तीय मंत्री श्री शिवनंदन सिंह पिलीघटा, जसबंत सिंह जी प्रान्तीय सदस्य , श्री हरि सिंह जी रघुवंशी संभाग कोषाध्यक्ष, श्री परमाल सिंह जी संभाग मंत्री,जिला अध्यक्ष राजकुमार जी, कोषाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह जी, जिला उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह जी, जिला सदस्य ओमप्रकाश जी, जिला मीडिया प्रभारी सुनील रघुवंशी,तहसील अध्यक्ष चन्द्रेश रघुवंशी भौंरा, तहसील मंत्री कल्याण सिंह जी उपस्थित रहे ।

Bhartiya Kisan Sangh (BKS) and the Coalition for a GM-Free India have taken strong objection to the Centre’s decision to allow GM soya meal for livestock feed.

While the BKS “condemned” and called the reason cited by the Ministry of Fisheries, Animal Husbandry and Dairying while granting permission to “import 15MT of soya deoiled cake obtained from GM soya seed for manufacturing of animal feed” as “not only ridiculous, but disgusting”, activists from the anti-GM coalition “condemned” the “no-objection certification” granted by the GEAC under the Ministry of Environment, Forest, and Climate Change, calling it “highly objectionable”.

The MoEFCC recently conveyed to the Department of Animal Husbandry and Dairying via a letter dated August 6 that “since soya de-oiled and crushed cake do not contain any living modified organism”, it has “no objection for import of soya cake or meal from environmental angle”, the Coalition for a GM-Free India said in its letter to Environment Minister Bhupendra Yadav

Calling the clearance “highly objectionable”, the group also accused the GEAC of “abdicating its responsibility on safety assessment of GM soy feed”.

“The EPA 1989 Rules for the manufacture, use, import, export, and storage of hazardous micro-organisms/genetically engineered organisms or cells are clearly applicable to not just genetically engineering organisms or living modified organisms, but also products and substances related to LMOs.

“The Rules refer to such products and substances in several clauses clearly, requiring the GEAC to perform safety assessment on products and substances derived from GMOs as well. The GEAC cannot and must not abdicate its responsibility for regulating to protect the environment, nature, and health, as given in the objective of the Rules,” the letter signed by Kavitha Kuruganti stated, urging Yadav to “reconsider the decision” and ensure that “GEAC performs its duty”.

The BKS “condemned” the decision, calling the reason for granting the permission “not only ridiculous, but disgusting”.

“Considering the pretext of permission, all the products where the living modified organism is directly not involved in any product will be permitted for import. If this is the case, then factually all the available products or by-products made up of using GM crops qualify for import.

“The BKS has time and again demanded that products and byproducts of agricultural commodities involving GM technology/event at any stage should not allowed, even for import, without a robust a policy guideline in place.

“It is a long-lasting demand of the BKS to form an inter-ministerial group to draft a policy for research, production, and use of GM commodities,” BKS general secretary Badri Narayan Chaudhary said in a letter to Atul Chaturvedi, Secretary, Ministry of Fisheries, Animal Husbandry and Dairying, and marked to Yadav, Agriculture Minister Narendra Singh Tomar and Minister of Fisheries, Animal Husbandry and Dairying Parshottam Rupala.