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कृषी आधारित अर्थ ववस्था ही विकाशशील हो सकती है

स्रोत: BKS-HND      तारीख: 03 Mar 2014 12:25:16

देश की नीति निर्माताओ द्वारा गत ६५ वर्षो से कृषी और किसानो की लगातार उपेक्षा किये जाने के कारण कृषी आधारित अर्थ व्यवस्था मंदी के गर्त मे डूब गई है | हमारा पूर्ण विश्वास है की कृषी एव ग्रामोद्योग आदि को आधार बनाकर अर्थ व्यवस्था की नये शिरे से रचना की जाये तो देश की अर्थ व्यवस्था पुन: स्थिर और विश्व मे अग्रणी हो सकती है | उक्त बाते कहते हुए भारतीय संघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष श्री अन्ना साहब मुकृटे ने कहा की भारतीय किसान संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया है | की देश की अर्थ व्यवस्था कृषी और ग्रामौध्योग आधारित करने से देश आर्थिक दृष्टि से सप्पन्न और समर्थ हो सकता है |

नादेड़ के गुरुद्वारा नानकासर मे सम्पूर्ण देश के आगे हुए ३५० प्रतिनिधीयो की उपस्थिति मे यह प्रस्ताव पारित करते हुए यह प्रतिनिधि सभा आज सपन्न हो गई |

इस अवसर पर भारतीय किसान संघ की अ. मा. महामंत्री श्री पभाकर केलकर ने कार्य कर्ताओ को आवाहन करते हुए कहा की आने वाले निर्वाचन मे लोकतंत्र शक्तिशाली करने के लिये शत प्रतिशत मतदान कराने का प्रयास करे | एक शक्तिशाली दृढ इच्छा शक्ति वाली सरकार ही देश को आर्थिक स्थिरता दे सकती है | अत: उन्होने देश की जनता का आवाहन करते हुए सावधान किया की देश को सही दिशा मे ले जाने के लिये मतदान हमारा अधिकार और हथियार है ! इसका उपयोग अवश्य करे|

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