नए दौर में भी कॅरियर का विकल्प है पशुपालनपशुपालन ऐसा एक क्षेत्र है, जिसे आज शहरों के पढ़े−लिखे बेरोजगार युवक भी अपना कर मोटी कमाई कर रहे हैं। ..
जैविक खेती अच्छी, लेकिन उपेक्षितजैविक खेती के बारे में ठोस भूमिका लेकर उसकी जानकारी किसानो तक पहुँचाने में शासकीय स्तर पर विलंब हो रहा है. ..
कॉरपोरेट कंपनियों के निशाने पर किसान सारी कवायद इस बात को लेकर है कि कैसे किसान खेतीबाड़ी और जमीन छोड़ने को खुद-ब-खुद मजबूर हो जाय और कॉरपोरेट/काण्ट्रैक्ट फार्मिग की बहुराष्ट्रीय व्यवस्था का रास्ता साफ होता जाय।..
हल्दी के पत्ते से तेलइस तेल से फोड़े और शरीर में बने घाव ठीक होते हैं, खांसी में भी इससे लाभ मिलता हैं, फिजिकल और मेंटल डिप्रेशन में भी बहुत यह लाभकारी है। ..
दिखने लगा है बी. टी. काटन का बुरा असरदस साल पहले जब सरकार ने 'जेनेटिक' बदलाव वाली बीटी काटन फसल उगाने को मंजूरी दी थी तब स्वयंसेवी संगठनों व स्वदेशी जागरण मंच ने उसके खिलाफ आवाज उठाई थी।..
लडकी के जन्म के साथ ही १० पेड लगाते है वो!धरहरा के लोगों ने मातृशक्ति का आदर, लड़कियों के भविष्य की व्यवस्था तथा वृक्षारोपण अभियान को बढ़ावा देने के लिए, लड़की के जन्म पर उसके नाम से दस पेड़ लगाने की प्रथा शुरू की...
भारत की जैव संपदा निजी कंपनियों को सौंपने की घातक साजिश12वीं शताब्दी में ही रूस के प्रसिद्ध वनस्पति विज्ञानी निकोलाई वाविलो ने भारत को कई फसलों का उत्पत्ति केंद्र (ओरिजिन ऑफ क्रोप) बताया था। ..
आन्ध्र से शुरु होगी ‘झिरो बजट खेती’ क्रांतिकिसानों का झुकाव नगद फसलों की ओर होने से लागत मूल्य और बढ़ा तथा खेती और महंगी होती गई. इससे खेती न पारंपरिक रही और न ही आधुनिक हो पाई. ..
कटहल बाबा वरदायिनी पहाड़, जिस पर ३० साल पहले एक भी पेड़ नहीं था, आज घना जंगल है. इस जंगल में विशेषकर कटहल के पेड़ है. आस-पास के गॉंव के लोग विवाह, उपनयन संस्कार व अन्य धार्मिक कार्यक्रमों के लिए कटहल के इस जंगल में आते है...
पर्यावरण हितैषी नानक खेतीश्री गुरुनानक देव जी ने मिल-बाटकर खाने का संदेश केवल मानव जाति के लिए ही नहीं, बल्कि सभी चराचर जगत् के लिए दिया है. उनके इन्हीं अमर वाक्यों में छिपा है पर्यावरण संरक्षण व जीव-प्रेम का सिद्धांत. इसी सि.....
केंद्र की ‘जल निजीकरण नीति’ अनुचित : भाकिसंजल नीति में जल को आर्थिक वस्तु मानकर, उसके व्यापारिकरण का पक्ष रखा गया है. भाकिसं ने इसका विरोध करते हुए इस नीति में योग्य संशोधन करने की मांग की है. ..
दयारामजी धाकड जी का सेंद्रिय कृषि का सफल प्रयोग रासायनिक खाद और कीट नियंत्रकों के बेशुमार प्रयोग के कारण, कृषि की हो रही हानि रोकने के लिए, भारतीय किसान संघ (भाकिसं) गत कई वर्षों से सेंद्रिय का प्रसार करने का प्रयास कर रहा है| ..
भाकिसं की प्रतिनधि सभा ३ फरवरी से म्हैसूर में प्रतिनिधि सभा का उद्घाटन कर्नाटक के प्रसिद्ध स्वामीजी जगद्गुरु श्री श्री श्री शिवरात्रिश्वर देशिकेंद्र महास्वामीजी, श्री वीरसिन्हासन महासंस्थान मठ, क्षेत्र सुत्तुर, करेंगे. ..