कृषि देवता भगवान बलराम जयंती (किसान दिवस) की
सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं। (भाद्रपद शुक्ल षष्ठी)।

भगवान बलराम

भारतीय किसान संघ की स्थापना भाद्रपद शुक्ल षष्ठी वि.सं.2047 (4 मार्च 1979) को राजस्थान के कोटा में हुई थी। इस दिन देश के 650 प्रतिनिधियों की प्रतिनिधि सभा में भारतीय किसान संघ की रिति-नीति व कार्यपद्दति के आयाम तय करने के बाद उसकी सतत किर्यान्विती हेतु ध्येय वाक्य, ध्वज, नारे, प्रेरणा स्रोत व्यक्तित्व को कुल देवता के रूप में स्वीकार करने पर गहरी चर्चा हुई।
संगठन की रिति-नीति में खेती करो और खेती ही करो के ध्येय वाक्य के साथ संगठन का भारतीय व कृषि स्वरूप को दर्शाने हेतु कुल देवता के रूप में एक व्यक्तित्व का चुनाव करना था जिसके लिए सर्वसम्मति से भगवान बलराम जी को कुल देवता के रूप में अंगीकार किया था।

भगवान बलरामजी का जीवन परिचय-

भगवान बलराम जी का जन्म भादवा सुदी षष्टी को हुआ था। बलराम जी भगवान कृष्ण के बड़े भाई व माता रोहिणी के पुत्र है।
एक किसान परिवार में जन्म लेने के बाद कृष्ण भगवान ने पशुपालन और बलराम जी ने कृषि को उन्नत करने पर काम किया था बलराम जी को सृष्टि के पहले नहर व बीज वैज्ञानिक कह सकते है। प्राकृतिक रूप से उपजे फसलों का बीज उत्पादन कर नहर से सिंचाई द्वारा व्यवस्थित खेती का अविष्कार किया था।
भगवान बलराम जी ने अस्त्र के रूप में हल व मूसल को अपनाया था इसलिए इन्हें हलधर भी कहते है।
अपने औजार से बुवाई व फसल निकालने के साथ दुश्मनों का संहार भी इनसे करते थे।
बलराम जी का राष्ट्रिय चरित्र बहुत ऊंचा था उन्होंने अपनी व्यक्तिगत अहंकार के बजाय राष्ट्र को सर्वोपरि मान कर ही काम किया इसका प्रमुख उदाहरण जरासंध के साथ युद्ध मे अपने आप का समर्पण कर देश को संकट से बचाने का कार्य है।

इसके अतिरिक्त भारतीय किसान संघ का गैरराजनीतिक स्वरूप बनाये रखने में भगवान बलराम जी की प्रेरणा शामिल है महाभारत के दौरान देश के राजा व सेनाएं किसी न किसी पक्ष की ओर से युद्ध के मैदान में थे तो उस दौरान भगवान बलराम जी ने किसी का पक्ष नही लेते हुए वो तीर्थ यात्रा में चले गए थे।

इस प्रकार कृषि के प्रतीक हल व मूसल को अस्त्र स्वीकार करके हलधर कहलाने वाले, प्रथम बीज व नहर वैज्ञानिक, राष्ट्रीय व गैर राजनीतिक विशेषता वाले भगवान बलराम जी को कृषि देवता के रूप में स्वीकार किया तब से ही भादवा सुदी षष्टी को इनके जन्म दिन को त्यौहार के रूप में मनाया जाता है।