सरकार किसानों के अनुकूल नीतियां बनाये, नहीं तो उग्र आन्दोलन होगा: प्रभाकर केलकर

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वाराणसी, 4 जुलाई।

विश्व संवाद केन्द्र के मालवीय सभागार में भारतीय किसान संघ द्वारा आयोजित पत्रकार-वार्ता को सम्बोधित करते हुए संगठन के राष्ट्रीय महामंत्री प्रभाकर जी केलकर ने कहा कि भ्रष्टाचार पर चौतरफा हमला के संकल्प के साथ भारतीय किसान संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी की बैठक सम्पन्न हुई। दिनांक 2, 3 जुलाई 2011 को चली बैठक में भ्रष्टाचार, महँगाई के साथ-साथ चार मुद्दों लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य घोषित करने, समक्ष कृषि उत्पादों को लाभकारी मूल्य पर खरीदी की सुव्यवस्था, कृषि के लिए पानी की व्यवस्था प्रथम प्राथमिकता, भूमि अधिग्रहण कानून से किसान-किसानी के अनुकूल परिवर्तन को लेकर आगामी तीन महिनों में देशभर के ग्रामों में, विकास खण्डों, जिलों में जन-जागरण अभियान कर सरकारों को चेतावनी दी जायेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश की राजधानियों में आन्दोलन एवं प्रदर्शन होंगे। यदि इसके बाद भी केन्द्र सरकार किसानों के अनुकूल नीतियां नहीं बनाती है तो दिल्ली कूंच का नारा दिया जायेगा। वर्तमान में दिल्ली सरकार की गलत नीतियों के कारण ग्रामीण आज संकट ग्रस्त है और किसान कर्ज में डूबकर आत्महत्या के गलत कदम उठा रहे हैं।

श्री केलकर ने सरकार को अगाह करते हुए कहा कि सरकार अपनी नीतियां सुधारें या उग्र आन्दोलन का सामना करने के लिए तैयार रहे। उन्होंने कहा कि इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

उन्होंने कहा कि कहा देश की लगभग 41 करोड़ जनसंख्या सर्वाधिक गरीब, अफ्रीकी देशों की जनता के स्तर पर जीवन-यापन करने पर मजबूर है। लगभग 50 प्रतिशत किसान कर्ज में डूबें हैं। भारत वर्ष के हर किसान पर औसतन 25902 रूपये का कर्ज है। किसानों को अपने उपज का लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य नहीं प्राप्त हो रहा है। जबकि बाजार में खाद्यान्न महंगे दाम पर बेचे जा रहे हैं। किसान सहित देश के लगभग सभी नागरिकों को सरकारी दफ्तरों में कार्य कराने के लिए सुविधाशुल्क देना पड़ रहा है। एक साजिश के तहत किसानों की जमीन अधिग्रहित करके कारपोरेट जगत एवं बढ़े पूंजीपतियों को देने का काम बड़ी तेजीसे किया जा रहा है। किसानों का बीज उनसे छिन कर बड़ी कम्पनियों को बीज उत्पादन करने का अधिकार दिये जाने का कुचक्र रचा जा रहा है। भूमि, जल व वन सम्पदा, खनिज, जैव-विविधता आदि को कारपोरेट जगत एवं बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को सौंपने की कपटपूर्ण योजना बनायी जा रही है। भ्रष्टाचार के विरूद्ध समाज के जागरूक एवं प्रतिष्ठित व्यक्तियों के आवाज को दबाने का हर प्रयत्न किया जा रहा है। देश की वर्तमान परिस्थिति सन् 1975 में लगे आपातकाल जैसी हो गयी है। बोलने का संवैधानिक अधिकार सत्ता बल से दबाया जा रहा है।

बैठक के विभिन्न सत्रों की अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अण्णा साहब मुरकुटे, उपाध्यक्ष गण सर्वश्री राघव रेड्डी, दयाराम धाकड़ एवं चन्द्रिकाबेन सेंजरिया ने किया। संचालन राष्ट्रीय मंत्रीगण सर्वश्री मोहनी मोहन मिश्र, युगल किशोर मिश्र, अंम्बु भाई पटेल तथा सुनील पाण्डेय ने किया।

भ्रष्टाचार पर चौतरफा प्रहार आवश्यक

भारतीय किसान संघ अखिल भारतीय प्रबन्ध समिति की बैठक में भ्रष्टाचार पर निम्नलिखित प्रस्ताव पारित किया गया।

आज देश में भ्रष्टाचार का डंका बज रहा है। घोटालों की बाढ़ आ गई है। सन् 1980 के दशक में आठ बड़े घोटालों की सूची थी, सन् 1990 के दशक में यह सूची 26 तक पहुँच गयी। सन् 2000 के दशक में यह सूची 100 का आकड़ा पार कर गयी तथा इसमें निरन्तर बृद्धि हो रही है।

जबसे आर्थिक उदारीकरण का दौर प्रारम्भ हुआ है। कालेधन का प्रवाह तेज हुआ है, विदेशों में जमा होने वाला कालाधन बढ़ा है और भ्रष्टाचार का स्वरूप अधिक जटिल एवं विस्तृत हुआ है। ग्राम विकास की योजनाओं के क्रियान्वयन में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। सरकारी कार्यालयों में अपना कार्य करने के लिए किसान सहित देश के अन्य नागरिकों का नित्य भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है। निर्लज्ज भौतिकता भ्रष्टाचार का मूल आधार है। सामाजिक-सांस्कृतिक व आर्थिक संरचनाओं में परिवर्तन लाये बिना भ्रष्टाचार का निर्मूलन संभव नहीं है। इसलिए आवश्यक है कि भ्रष्टाचार पर चैतरफा प्रहार किया जाय।
आज भ्रष्टाचार के विरूद्ध देशव्यापी जनजागृति अभियान चलाने की आवश्यकता है। देश में भ्रष्टाचार एवं कालेधन के विरूद्ध जो अभियान शुरू हुआ है वह सराहनीय कदम है, भारतीय किसान संघ ऐसे सभी प्रयासों का समर्थन करता है तथा अखिल भारतीय प्रबन्ध कार्यकारिणी भारत सरकार से माँग करती है कि-

1. विदेशी बैकों में जमा कालाधन तत्काल वापस लाया जाए तथा उसे राष्ट्रीय सम्पत्ति घोषित किया जाय।

2. कालेधन की अर्थव्यवस्था पर सरकार संसद में श्वेत-पत्र प्रस्तुत करे।
3. कालेधन का 75 प्रतिशत भाग कृषि को लाभकारी बनाने तथा ग्रामीण विकास पर खर्च किया जाय।

4. भ्रष्टाचार से निपटने के लिए प्रभावी दण्डात्मक कानून बनाया जाय तथा निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक न्यायालयों का गठन किया जाय।

5. स्वास्थ्य एवं शिक्षा का बेलगाम निजीकरण रोका जाय।

6. भ्रष्टाचार में संलिप्त पाये जाने वाले व्यक्तियों के चुनाव लड़ने पर प्रतिबन्ध लगाया जाय।

MP to take farmers consent before acquiring land

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Indore, Jun 24

Madhya Pradesh Government will take care of farmers interests while acquiring their land for industrial projects, State’s Industries Minister, Kailash Vijaywargiya said here today.”We will acquire farmers land for the industrial projects only after taking their consent,” Vijaywargiya told reporters after a programme here.To a question, he said that Land Acquisition Act is there, but while acquiring land for industries the government would take care of farmers’ interests.The farmers under the banner of Bhartiya Kisan Sangh had organised a massive protest here recently against the present Land Acquisition Act and demanded it to be replaced with a new one.

Address : Bharatiya Kisan Sangh : 43 Deendayal Upadhyaya Marg New Delhi - 110002 Tel.: 011-23210048