हमारे उत्सव
हमारे उत्सव
दिनेश कुलकर्णी
अ.भा. संगठन मंत्री
भारतीय किसान संघ में अनेक प्रकार के कार्यक्रमों की रचना उद्देश्य / ध्येय प्राप्ती की ओर बढने के लिये की जाती है। इसी क्रम में ग्राम स्त्तर पर पुरे वर्ष भर में चार प्रासंगिक कार्यक्रमों की योजना की है। यह चार कार्यक्रम है, किसान दिवस - भगवान बलराम जयन्ति ; [भाद्रपद शु. षष्ठी], गोमाता पूजन ; [गोपाष्टमी], भारतमाता पूजन ; [26 जनवरी] और स्थापना दिवस ;[4 मार्च]। ये चार कार्यक्रम हर ग्राम में हो यह किसान संघ का आग्रह रहता है। और उसके लिये प्रयास भी होता है।
अपना देश कृषि संस्कृति वाला देश है। इसके कारण कृषि, खेती से संबंध रखने वाले अनेक त्योहार, उत्सव साल भर में हमारे देश में होते रहते है। जैसे मकर संक्राति, बिहू, बैलों की पुजा ;पोला, नवधान्य की पुजा, खेतो की पुजा आदी-आदी, ऐसा रहते हुये किसान संघ ने ये चार ही उत्सव क्यों अपनायें ? यह प्रश्न हमारे मन में खड़ा रह सकता है।
यह चार कार्यक्रम अलग-अलग प्रकार के है। हर कार्यक्रम के पिछे अलग धारणा है, संकल्पना है। ये चारो कार्यक्रम अलग-अलग प्रकार के है किन्तु जो किसान संघ का ध्येय है उसकी पुर्ति करने वाले है।
किसान दिवस- भगवान बलराम जयन्ति - ;[भाद्रपद शु. षष्ठी] अपने देश में सभी प्रकार के दिन मनाते है किन्तु किसान दिवस कोई नही मनाता था। और जो भी मनाते थे वे किसी राजनेता के जन्मदिन या स्मरण दिन को इस रूप में मनाते थे।
किसान संघ ने शुरुवात करने से पहले हमारे यहां कृषकों ने देवता के रुप में भी कोई नही थे। किसान संघ के संस्थापक कार्यकर्ताओं ने मिलकर विचार करके कृषि-कृषकों के देवता के रुप में श्री भगवान बलरामजी को उनके जीवन कार्य का अध्ययन करके अपनाया।
हम सब जानते है कि भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भैय्या श्री बलरामजी जिन्हों ने ‘हल’ और ‘मुसल’ को अपने शस्त्र के रुप में अपनाया है। वास्तविक रुप मे ये दोनों साधन खेती में काम में आते है। भगवान बलराम जी ने उन दिनों में यमुना जी से नहरें निकालकर ब्रज की प्यासी धरती को पानी पिलाया था। जिसके कारण वह भुमि सुजलाम् सुफलाम् हो गई थी। हल का प्रयोग करके भुमि फसल लेने योग्य बनाई जाती है और जो फसल पैदा होती है तो उसके उपर प्रक्रिया पुराने दिनों में मुसल जैसे साधनों से ही कि जाती थी। इस प्रकार से आज की परिभाषा में कहना है तो हम ‘हल’ को उत्पादन का और ‘मुसल’ को प्रक्रिया का प्रतिक कह सकते है। श्री बलराम जी खेती के प्रति लगाव इतना जादा था की इन दोनों साधनों को उन्होंने सदा के लिये अपने साथ रखा। इतना ही नही, आवश्यकता पड़ने पर इनका शस्त्र जैसा प्रयोग भी किया। हम जब कोई मंगल कार्य करते है तो वहां भगवान की स्थापना करते है, पुजा करते है और हमारा कार्य सफल हो ऐसी कामना करते है। समर्थ रामदास स्वामीजी ने भी लिखा है ‘सामर्थ्य आहे चळवळीं चे, जो जो करिल तयांचे, परंतु तेथे अधिष्ठान पाहिजे भगवंताचे’ अर्थात- जो भी संगठन करेगा, आंदोलन करेगा वह सामर्थ्य शाली होगा किन्तु उसके लिये भगवान का अधिष्ठान चाहिये। इसलिये किसान संघ के कार्य के लिये श्री भगवान बलरामजी को छोड़कर और कौन सी अधिष्ठात्री देवता हो सकती थी ? और स्वाभाविक रुप से उनके जन्म दिवस ; भाद्रपद शुक्ल षष्ठी को किसान दिवस के रूप मे मनाने का तय किया गया। इसके कारण हमारे कार्य को भगवान का अधिष्ठान भी प्राप्त हो गया और जहां भगवान का अधिष्ठान रहता है वह कार्य यश प्राप्त करता ही है। इस दिन गाँव में श्री बलरामजी की प्रतिमा पूजन करके गाँव में सब लोग मिलकर उत्सव मनायें, झाँकीयां निकाल कर नगर भ्रमण हो। सह भोज भी हो सकता है। यह दिन भाद्रपद मास में आता है इस समय फसलों पर भी कोई जानकारी देने का कार्यक्रम हो सकता है।
गौ माता पुजन ;गोपाष्टमी- गोपाष्टमी के दिन देश में सभी जगह पर गोमाता पूजन का कार्यक्रम मनाया जाता है। गोवंश का महत्व हम सब लोग जानते ही है और कृषि के संबंध् में तो गोवंश तो आधार ही है। गोवंश ही सही मायने में कृषि का आधार रहा है, जिसके कारण खाद, किटनाशक एवं काम के लिये बैलों की आपुर्ति होती है। किन्तु बिच के काल में पाश्चात्य विचारों के बहकावे में आकर हम ने इस मौलिक बातों को छोड़ दिया था। उसके दुष्परिणाम जब सामने आने लगे तो फिर से गोवंश को आधर मान जैविक खेती अनेकों किसान करने लगे है। किसान संघ ने गोमाता पूजन कार्यक्रम करने का निर्णय इसलिये लिया की जो भी हमारी मदत करता है उनके प्रति कृतज्ञता प्रगट करना यह हमारी संस्कृति है। पुरे साल भर ही नही अपितु आजीवन पर्यंत भी जो हमारी सहायता करती है, हमारी खेती चलाती है उसके प्रति कृतज्ञता प्रगट करना स्वाभाविक है। यह कृतज्ञता व्यक्त करने के लिये किसान संघ ने इसको मनाने का निर्णय लिया। इस दिन गाय की पुजा करके गाँव की सभी गोवंश को एकत्रा करके शोभा यात्रा निकालते है। इसी अवसर पर अच्छे ‘गोपालक’ को पुरस्कृत करना, पशु चिकित्सा शिबिर का आयोजन करना, अच्छी दूध देने वाली गाय को पुरस्कृत करना आदी-आदी उपक्रम किये जा सकते है। जैविक खेती के बारे में जानकारी देना, गोबर-गोमुत्र से खाद, किटनाशक दवा बनाने के प्रशिक्षण देना, गोवंश के आधर पर जैविक खेती करने वाले किसानों का सम्मान करना इत्यादी उपक्रम हम इस अवसर पर कर सकते है। इस प्रकार से हमें अपनी गाय के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर मिलता है, इसलिये किसान संघ में गोमाता पूजन का कार्यक्रम किया जाता है।
भारत माता पूजन ; 26 जनवरी- भारत माता के नाम से हम अपने इस पवित्र देश को जानते है। देश याने केवल जमिन का टुकड़ा नही होता है, तो वहां रहने वाला समाज माने देश होता है, और सभी इस भारतमाता के पुत्र कहलाते है, याने पुरा समाज बंधुसमान होता है। ऐसे समाज के कारण ही हमारा जीवनयापन सुचारू रूप से चलता है। समाज मे अनेक प्रकार के काम समाज के व्यक्ति द्वारा चलते रहते है जिसका प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष लाभ सब समाज को मिलता रहता है। अध्यापक पढ़ाता है तो अच्छे संस्कार मिलते हैं, कारीगर काम करता है तो अनेक प्रकार के साधन मिलते है जिसके कारण जीवन सुखकर होता है। ऐसा विराट समाज पुरूष अपने अनेक हाथों से निरंतर कार्य करता रहता है जिस के कारण हम अपना जीवन अच्छी तरह से चलाते है। किसान संघ में शुरू से ही पारिवारीक भाव रहा है। पुरा गाँव एक परिवार है यह किसान संघ का मानना है। ऐसा जो समाज, गाँव एक दुसरे की मदत करता है उसके प्रति कृतज्ञता प्रकट करना और साथ-साथ अपने स्वंय के समाज के प्रति कर्तव्य का स्मरण करना आवश्यक है और इस के लिये 26 जनवरी, जिस दिन हमने आधुनिक काल में सभी व्यवस्थाओं को प्रजा के याने समाज के अधिन किया, को छोड़कर और अच्छा दिन कौन सा हो सकता है ? इस समाज पुरूष का चिंतन माने भारत माता का चिंतन, स्मरण। उसके प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुये
अपने कर्तव्य का स्मरण करना ही सही में भारत माता पूजन है और इसी भावना के साथ किसान संघ ने इस कार्यक्रम को अपने प्रमुख कार्यक्रमों में रखा है। सभी ग्राम समितियाँ 26 जनवरी के दिन गांव के मुख्य चौक में, मन्दिर में, खुले जगह में भारत माता के प्रतिमा का पूजन गांव के किसी वरिष्ठ जन के द्वारा करवाती है। यथा संभव शोभा यात्रा निकाली जाती है। इस अवसर पर समाज और गांव में अच्छे कार्य करने वाले व्यक्तिओं का सम्मान भी किया जाता है। अच्छा अध्यापन करने वाले अध्यापक, घुस न लेते हुये प्रामाणिकता से कार्य करने वाले सरकारी कर्मचारी इनका सम्मान किया जाता है। प्रतिभा शाली, गुणवान छात्रों का सत्कार, सम्मान करना। गांव, मन्दिर, विद्यालय आदी स्थानों की सामुहिक श्रमदान से सफाई, गाँव में सब के काम आये इसलिये जल संरक्षण, तालाब आदी की सफाई, रक्तदान शिबिर आदी कार्य भी इस अवसर पर किसान संघ द्वारा हाथ में लिये जाते है।
स्थापना दिवस ; 4 मार्च - इस कलयुग में हम सब अभी लोकतंत्र में जी रहे है। भगवान श्रीकृष्ण ने ‘संघ शक्ति कलियुगे’ करके संदेश भी दिया है। हमारे किसानों की जो दशा आज हुई है उसका मुख्य कारण यही है की वह असंगठीत है। असंगठीत होने के कारण अनेक प्रकार के अन्याय, अत्याचारों का वह भुक्त भोगी है। इसी स्थिती को समझ कर 4 मार्च 79 से देशभर के किसान कार्यकर्ताओं ने ‘कोटा’ राजस्थान, में किसान संघ की स्थापना की ओर नित्य-सि( जागृत, प्रशिक्षित किसानों का संगठन खड़ा करने का प्रण किया। जिसके फलस्वरूप संपुर्ण देश में भारतीय किसान संघ किसानों के हितों की रक्षा करने के लिये खड़ा है। यह जो ऐतिहासिक घटना जिस दिन घटी वह दिन स्वाभाविक रुप से किसान संघ में मनाया जाता है। जिसके कारण हर किसान को संगठन का महत्व स्मरण में रहता है। संगठन का स्मरण स्वंय को एवं समाज को कराते रहना आवश्यकता रहता है। जिसके कारण व्यक्ति का आत्मविश्वास जगता है। संगठन में यह विश्वास जगने से ही अनेक कार्य अपने आप हो जाते है और समाज में जो किसान हितों के विरोध में कार्य करनेवालें व्यक्ति संगठन का रुप देखकर घबरा जाते है और अपने अनुचित कामों को छोड़ देते है। इस प्रकार से संगठन का महत्व सब के सामने लाने के लिये यह स्थापना दिवस किसान संघ में मनाया जाता है। इस दिन शक्ति प्रदर्शन के कार्यक्रम जैसे किसानों का एकत्रिकरण, शोभायात्राऐं निकाली जा सकती है। अनेक प्रकार की स्पर्धाओं का आयोजन, जैसे खेल, भजन, अच्छे कृषि उत्पाद का प्रदर्शन कर सकते है। जिन कार्यक्रमों के माध्यम से समाज को किसान संघ के संगठन के शक्ति का आभास हो, अनुभव आये जैसे कार्यक्रमों की योजना, रचना कर सकते है। स्थापना दिवस संगठन के दृष्टि से महत्वपुर्ण है। इस दिन सभी कार्यकर्ता कार्य को बढ़ाने के लिये संकल्पबद्ध होकर पुरे वर्षभर की कार्य योजना बनायें और आर्थिक दृष्टि से भी कार्य और संगठन स्वावलंबी हो इसका संकल्प इस अवसर पर करके पुरा करें, ताकि संगठन मजबुती के साथ आगे बढ़े। ये चारों कार्यक्रम सभी गांवों में एक ही दिन में हो किन्तु ये कार्यक्रम एक सप्ताह तक मनायें जा सकते है। किसान दिवस ;भगवान बलराम जयंति - हमारे कार्य को भगवान का अधिष्ठान प्राप्त हो, गोमाता पूजन- कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए, भारत माता पूजन- वृफतज्ञता के साथ-साथ समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्व का बोध कराने के लिए और स्थापना दिवस- संगठन का महत्व, अपने में आत्म विश्वास जगाने एवं समाज को शक्ति दिखाने के लिए साथ-साथ संगठन की ताकद बढ़ाने के लिए, इन चार विशेष कार्यक्रमों की योजना किसान संघ में होती है।