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भारतीय किसान संघ का त्रिदिवसीय जैविक खेती राष्ट्रीय प्रशिक्षण

स्रोत: BKS-HND      तारीख: 27 Dec 2014 18:11:44

झालावाड (असनावर) , 26 दिसम्बर। जैविक कृषी से ही जमीन की समृद्धता बढेगी।यह किसान को स्वावंलबी बनाने में एक मात्र मददगार है। किसान स्वावंलम्बी होगा तो भारत भी समृद्ध होगा । ये विचार भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री दिनेष कुलकर्णी ने त्रिदिवसीय राष्ट्रीय जैविक खेती प्रशिक्षण वर्ग के उद्घाटन के मोके पर व्यक्त किये।

जिले के असनावर के समीपस्थ मानपुरा ग्राम में वर्ग भाग ले रहे देश के करीब दो दर्जन राज्यो के जैविक खेती कर रहें किसान संघ पदाधिकारियों को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रीय संगठन मंत्री कुलकर्णी ने कहा कि हमें कृषी लागत को कम करने के लिए प्रयास करने होगे। इसका एक मात्र रास्ता जैविक खेती ही है।उन्होने कहा कि आज किसान की अर्थव्यवस्था बाजार आधारित हो गई हैं। इसके चलते कृषी अलाभकारी हो गई है। उन्होने कहा जैविक खैती जीवन पद्वति है । हमारी धार्मिक मान्यताऐ, शास्त्र व पराम्पराऐं जैविक खैती हैं। सृष्टी के भरण पोशण की प्रक्रिया जैविक है। कुलकर्णी ने देश में जैविक कृशि केा बढावा दे रहे किसानो को कहा कि जमीन तो हमें सब कुछ देती है लेकिन हम उसे कुछ नही दे रहे।

उन्होने कहा कि जो पैदा होता हैं उससे बचा अपषिश्ट धरती को देना ही जैविक है। अपषिश्ट को जलाने पर चिन्ता व्यक्त करते हुए उन्होने कहा कि जिसको जलाते है वो प्रक्रिया से बाहर हो जाता हैं। यही किसान की सबसे बडी कमजोरी हैं इस कमजोरी को बाहर निकालने का काम किसान संघ कर रहा है। उन्होने देश को समृद्ध बनाने के लिए जैविक खेती को आवश्यक बताया।


इससे पूर्व जैविक खेती के 28 दिसंबर तक चलने वाले इस प्रशिक्षण वर्ग का विधिवत उद्घाटन गौ पूजन, हल पूजन व किसान संघ का झण्डारोहण करके मानपूरा स्थित स्वामी विवेकानन्द जैविक कृषि अनुसंधान केन्द्र मे राष्ट्रीय महामंत्री प्रभाकर राव केलकर ने किया।

प्रथम सत्र मे भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय सहजैविक प्रमुख रतन लाल डागा ने संबोधित करते हुए जैविक लगातार कृषि की आवश्यकता, तरीके समेत कम लागत में कृषि करने की जैविक कृषि विधि को समझाया। उन्होने कहा कि जैविक खेती करने के लिए फसल से बात करनी सिखनी होगी। उन्होने इसके नुक्से भी किसानो को बताये।

किसानो के दो ग्रुप बनाकर खेतो में भ्रमण करवाकर मानपूरा ग्राम में कि जा रही जैविक खेती को प्रायोगिक रूप में बताया। इसमें हुकमचन्द पाटीदार, सुरेश शर्मा व कृषि वैज्ञानिक डा. मधुसूदन आचार्य ने जैविक प्रकिया को किसानो को समझाया।

वर्ग में राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, समेत कर्नाटक, तमिलनाडु, हिमाचलप्रदेश, बिहार, उड़ीसा आदि देश के सूदूरवर्ती कोई दो दर्जन राज्यों से भारतीय किसान संघ से जुड़कर जैविक कृषि कर रहे किसान भाग ले रहे है।

द्वारा- हेमराज यदुवंशी. प्रदेश प्रचार प्रमुख

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