भारतीय किसान संघ के प्रबंध समिति की बैठक
| स्रोत: BKS-HND तारीख: 24 Feb 2015 11:42:58 |
भारतीय किसान संघ के प्रबंध समिति की बैठक जबलपुर में २८ , २९ जुलै को संपन्न हुई। बैठक में निम्न प्रस्ताव पारित किये गये।
प्रस्ताव क्र० -३
काम वर्षा एवं मौसम विभक् के गलत पूर्वानुमान किया था की इस वर्ष किसानों की हुई क्षति को राष्ट्रिय आपदा घोषित किया जाये।
भारतीय मौसम विभाग ने पूर्वानुमान किया था की इस वर्ष ९६ प्रतिशत वर्षा होगी। उसके बाद जून २०१२ में घोषित किया की वर्षा ८६ प्रतिशत होगी। वर्त्तमान में उनका अनुमान है। की पूर्व भारत में ७ प्रतिशत दक्षिण भारत २२ प्रतिशत तथा पश्चिम और उत्तर भारत में ४२ प्रतिशत काम वर्षा होने के कारन सुखा आ रहा है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के कारण किसानों ने फसल की बिजाई कर दिया था। काम वर्षा के कारन बर्बाद हो गया है। इस प्रकार की गलती मौसम विभाग ने १९८७ से २०१२ तक १६ बार किया है।
देश के ७० प्रतिशत लोग कृषि पर एवं देश की कृषि वर्षा पर निर्भर है। मौसम विभाग का हर एक गलत पूर्वानुमान ७० प्रतिशत लीगों के जीवन एवं देश के खाद्यान्न सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। गलत पूर्वानुमान के कारन हरे किसान का प्रति एकड़ - प्रति बिजाई हजारों रुपये की क्षति हुई है। इसका जिम्मेवार कोई नहीं है। भारतीय किसान संघ की अखिल भारतीय प्रबंध समिति भारत सरकार से यह माग करती है की -
१ ) गलत पूर्वानुमान के कारन किसानो की हुई क्षति को राष्ट्रिय आपदा राहत कोष से पूर्ति की जाये।
२) मौसम के सटीक पूर्वानुमान हेतु प्राचीन भारतीय एवं अत्याधुनिक पद्धतियों का उपयोग किया जाये।
प्रस्ताव क्र . २
कृषि एवं बहुब्राण्ड खुदरा व्यापर के संप्रभुता की रक्षा के लिये प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बंद हो - कृषि के पश्चात (>65%) अपने देश में ८ लाख करोड़ के कृषि उपज के खुदरा व्यापर का राष्ट्रिय जि. डि. पी. में 10% का हिस्सा है तथा 7% से अधिक कर्मचारी कार्य करते है जिनकी संख्या 8 करोड़ से अधिक है अपने देश में कृषि उपज का मुख्य रूप से 28000 थोक व्यापार और प्राथमिक ग्रामीण बाजारों तथा 7557 नियमित बाजारों द्वारा व्यापर किया जाता है। उसमे 70% कृषि उपज स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होता है। अपने देश में पारम्परिक रूप से फुटकर व्यापार स्टोर , पटरी व्यापारी , साप्ताहिक बाजार , फेरी दुकानदार , ठेला दुकानदार जाता है जो लगभग 99% खाद्य एवं परचून का व्यापर बहुत ज़माने से करते आ रहे है जो परम्परागत कृषि के साथ अपने देश की जीवन दायनी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इस क्षेत्र में लगभग 5 करोड़ छोटे दुकानदारों तथा 4 करोड़ छोटे एवं मध्यम एवं साहसिक कार्यो से 35% छोटे असंगठित फुटकर व्यापारियों द्वारा 30 करोड़ व्यक्तियों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष स्वतः कार्य प्राप्त होता है। 100 मिलियम डॉलर से कम का निवेश नहीं , एक मिलियम की अाबादी से कम के शहर में नहीं तथा कम से कम 30% भारत के छोटे एवं मध्यम उद्यमिता के उत्पाद के शर्तो के साथ केंद्र द्वारा गठित सचिव स्तरित समिति द्वारा स्वीकृत करने के पश्चात 24 नवम्बर 2011 को केंद्रीय मंत्री मंडल ने 51% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की बहु ब्रांण्ड फुटकर व्यापर में अनुमति प्रदान कर दी। इस कार्य का अनेक माध्यमो से इस आरोप के साथ विरोध किया गया है की सरकार राष्ट्रहित के विरुद्ध बलमार्ट एवं टेस्को जैसी दैत्याकार विदेशी खुदरा व्यापारिक कम्पनियो के दबाव में कार्य कर रही है। कड़े जान विरोध के कारण सरकार द्वारा 3 दिसंम्बर 2011 को इस निर्णय पर रोक लगनी पड़ी। केंद्र सरकार खुदरा व्यापर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के पक्ष में बहस कर रही सरकार बार - बार चोर दरवाजे एवं अस्पष्ट माध्यमो से ऐसे लागू करना चाहती है।
सरकार घुर्तता के साथ को कुमार्ग पर ले जा रही है एवं भ्रमित करते हुए ऐसे तर्क प्रस्तुत कर रही है जिसका वास्तव में कोई अर्थ नहीं है। सरकार का अनुसार
खुदरा व्यापर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश भारतीय अर्थव्यवस्था के लिये जादू की छड़ी है। सरकार का कुतर्क है की अधिक रोजगार पैदा करेंगी मुद्रा स्फीति कम करेगी किसान अपने उत्पाद का और अधिक पैसा प्राप्त करेंगे और यह लघु एवं मध्यम व्यापर को बढ़ावा देगी। विशेषकर शीतगृह व् भंण्डारण के क्षेत्र में आधारभूत का निर्माण करेंगी यह फसल कटाई क्षति को कम करेगी। यह व्यापार की श्रखला से बिचौलियों को हटा देगी। जिससे उपभोक्ता और भी कमदाम पर खरीद सकेंगे। अंतिम रूप से सरकार का यह कहना है की बहुब्रांण्ड खुदरा व्यापर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हमारे देश के समक्ष प्रस्तुत सभी चुनौतियों का एकमेव निसकरण है। यह जादू डंडा है। सरकार का कहना है की बहुब्रांण्ड खुदरा व्यापर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश द्वारा एक करोड़ नौकरीया पैदा की जाएगी यह धूर्तता है। उदहारण के तौर पर बालमार्ट (यु.एस.ए.) जिसका व्यापर 4000 ख़राब रु. का है उसने केवल 21 लाख नौकरियां दी है। इसके विपरीत भारतीय खुदरा व्यापार के क्षेत्र में भारतीय खुदरा व्यापारियों का व्यापार भी 4000 ख़राब रु. का ही है जिसके पास 120 लाख दुकाने तथा 440 लाख कर्मचारी कार्यरत है। ब्राजील में बहुब्रांण्ड में बड़ी कंपनियों के आने के बाद फल एवं सब्जियों के व्यापर में छोटे दुकानो की भागेदारी 27.8% घाट गयी है। इसी प्रकार अर्जेनटिना में 30% एवं इण्डोनेशिया में 9% भागीदारी घट गयी है। थाइलैण्ड में सब्जियों की अपूर्ति करने वाले पहले 250 थे अभी केवल 10 बचे है। अमेरिका एवं इंग्लैंण्ड में बहुब्रांण्ड रिटेल में दूध उत्पादक को उपभोक्ता मूल्य का केवल 30% - 35% ही मिलता है। जबकि अमूल डेरी के अनुसार भारत में 70% मूल्य मिलता है क्यों की यहाँ बड़े - बड़े स्टोरों का एकाधिकार नही है। खुदरा दैत्यों का प्रथम ग्रास वे महिलाये होगी जो नित्य ताजे फल एवं सब्जिया कठिन परिश्रम के पश्चात शहरों में दरवाजे - दरवाजे पहुंचाकर अपने परिवारों को का भरण पोषण करती है तथा खुदरा व्यापर में वदेशी निवेश उस मध्यम व्यक्ति को सबसे पहले समाप्त करेगा जो उपभोगक्ताओ को न्यूनतम मूल्य पर सामान बेचते है तथा उधार की भी सुविधा देते है।
निष्कर्ष -
1. विकशित देशों में इन दैत्याकार खुदरा कम्पनियो द्वारा किसान को कोई लाभ नहीं मिला है।
2. शीतगृह और हीमीकरण तथा भण्डार गृह किसी विशेष तकनीक की रखते। इन्हें बिना बाहरी सहयोग से तैयार किया जा सकता है। आवश्यकता है मात्र सरकार के इच्छाशक्ति की।
3. उन बड़े फुटकर व्यापारियों द्वारा तय किये जाने वाले मानको एवं कीमतों को छोटे किसान नहीं झेल पायेंगें।
4. बहुत से कसान अपनी आय और दैनिक प्रयोग की वस्तुओ के लिये पड़ोस के दैनिक बिक्री केंन्द्रो पर निर्भर रहते है , अब इन फुटकर विदेशी व्यापारियों के कारण बाधित होगें तथा अपेक्षाकृत कमदाम पर बेचने के लिए बाध्य होगें।
5. ग्रामीण क्षेत्र में अत्यधिक हिमीकरण का कुप्रभाव होगा पर्यावरणीय असंतुलन।
6. इन दैत्याकार विदेशी बहुराष्ट्रीय खुदरा कंपनियों के नियमों के अधीन जनता को स्वास्थप्रद एवं ताजा भोजन उपलब्ध करने के समक्ष सवालिया निशान खड़ा हो जायेगा।
7. भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पोषक एवं जैव भोज्य पदार्थ की वर्तमान उपलब्धता एवं आपूर्ति भी इनके द्वारा प्रभावित होगी।
8. हमारी खाद्य श्रंखला की विविधता नष्ट जायेगी क्योकि इनकी शोषक पध्दति विविधता को अनुमति नहीं देती। इनके व्यापर की पध्दति एकल पध्दति है।
9. क्या इन बड़े फुटकर व्यापारियों द्वारा आयातित स्वास्थ के लिये खतरनाक जी.एम. खाद्यपदार्थ पर प्रतिबन्ध लगाया जायेगा ? उत्तर है नहीं।
10. अन्ततः यह कतिपय लोगों की जीवन शैली में परिवर्तन लायेगा तथा अपेक्षाकृत अधिक सामाजिक असंतुलन पैदा करेगा।
11. संकलित विकास के लिये एवं संपत्ति का योग्य वितरण आवश्यक है , जो की आज की भारतीय खुदरा व्यापर में ही संभव है। खुदरा व्यापर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश अर्थ एवं संपत्ति को केन्द्रिभुत करेगा। हम जानते है की भारत खुदरा व्यापर का प्रजातिक देश है लोगो ने अपने सांगठित क्षमता के आधार पर सैकड़ो हजारो सप्तिहिक हाट और बाजार देश में चारो तरफ स्थापित कर रखा है हमारी गालिया सजीव जीवन्त और सुरक्षित बाजार है तथा करोड़ों - करोड़ों व्यक्तियों के लिये अजीविका के साधन है। एक ऐसे देश में जहा लोगो की संख्या बहुत बड़ी है तथा गरीबी है वहां आर्थिक स्थाईत्व के लिए सर्वोचित है भारत की वर्तमान खुदरा व्यापर की व्यवस्था। इस प्रकार हम निष्कर्ष निकलते है की बहु ब्रांड फुटकर व्यापर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का परिणाम होगा - बहुत बड़े
पैमाने पर बेरोजगारी , श्रमिको का शोषण , किशानो की लूट , उपभोक्ताओं से अधिकतम धन वसूली।
अतः उपर्युक्त स्थितियों के साथ भारतीय किसान संघ की अखिलभारतीय प्रबंध समिति यह प्रस्ताव करती है कि राष्ट्र के बृहत्तर हित में और किसानो , श्रृंमिकों लघुव्यापारियो के हित में तथा देश की आर्थिक स्थिति के पोषण के हित में भारत सरकार दैत्याकार विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपननियो के दबाव में समर्पण न करें तथा खुदरा व्यापार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के प्रस्ताव को तत्काल वापस ले एवं हमारी आर्थिक संप्रभुता , संपन्नता , पोषणीय अर्थव्यवस्था को पराश्रयी बनाने की चल रही प्रक्रिया बन्द की जाये। भारतीय किसान संघ की प्रबंध समिति देश के नागरिको से अपील कराती है कि खुदरा व्यापार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के विरुध्द इस अभियान में तत्काल सक्रिय हों।