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कपास के कमतर मूल्य परकिसानों का धरना-प्रदर्शन

स्रोत: BKS-HND      तारीख: 03 Dec 2014 11:16:48

अमरेली: भारतीय किसान संघ ने अमरेली जिला कलेक्टर परिसर में गुरुवार को धरना-प्रदर्शन किया। भारतीय किसान संघ ने कपास, मूंगफली और ज्वार की फसल पर लागत के आधार पर मूल्य देने संबंधी एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। ज्ञापन में प्रशासन को चेताया गया कि यदि हमारी मांगों के अनुरूप मूल्य लागू नहीं हुआ तो इसी तरह का विरोध सौराष्ट्र के अन्य जिलों में भी किया जाएगा।अमरेली जिले के राजकमल चौक पर 3000 से ज्यादा किसान इस प्रदर्शन में शामिल हुए। यहां आए किसानों ने कृषि उपज पर लागत के आधार पर बढ़ा हुआ मूल्य लागू करने की मांग की। किसानों ने अपनी मांगों को लेकर कलेक्टर परिसर में जुलूस निकाला और मांग संबंधी एक ज्ञापन पत्र भी दिया।कृषि उपज व्यापार समिति ने कपास का मूल्य 800 रखने पर निराशा जताई। समिति के अनुसार इस मूल्य से किसानों का गुजारा नहीं हो सकता। यह मूल्य काफी पुराना है, जबकि कपास के उत्पादन में लागत अधिक आ रही है। इसी लागत के आधार पर मूल्य तय किया जाना चाहिए। कपास उत्पादक की हालत पहले से खस्ता है, अब उसे पूरी तरह मिटाने की तैयारी हो रही है।हमारी मांग है कि केंद्र सरकार द्वारा लागू कपास का मूल्य प्रति 20 किलो 800 से 810 रुपये सुनिश्चित है। राज्य सरकार को किसानों के हित में कुछ इसी प्रकार बढ़ाकर गुजारा करने लायक मूल्य तय करना चाहिए।भारतीय किसान संघ के गुजरात जैविक कृषि सेल के अध्यक्ष प्रफुल्ल सेजलिया ने कहा कि किसान संघ ने किसानों को मजबूत और स्वावलंबी बनाने का बीड़ा उठाया है। सेजलिया ने कहा कि सरकार को कपास पैदा करने वाले किसानों को कम से कम 1200 रुपये मूल्य देना सुनिश्चित करना चाहिए। बिना मौसम के हुई बारिश का कहर झेल रहा किसान पहले से ही बर्बाद हो चुका है। ऐसी स्थिति में सरकार द्वारा कपास का सही मूल्य लागू न करना किसानों को आत्महत्या करने पर मजबूर करेगा।

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